हम हैं कौन ?(आधी आबादी)#3 अक्टूबर,2004

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https://youtu.be/Lqt27PphIe0

 
हम हैं कौन ?


तुम्हारे खेल की गेंद कि जब चाहो ठोकर मार लो? 

या फिर तुम्हारे शरीर की कमीज की जब चाहो खोलो पहन लो ?

या अपने घर की दीवार की जब चाहे खूंटी ठोक दो? 

या फिर बाल के जुड़े कि जब चाहो कंघी लगाकर निकाल दो? 

या फिर बच्चों के खेलने का मिट्टी का घरौंदा कि जब चाहो भांग दो तोड़ दो ?

या फिर बाजार के बिकती वस्तु में जिसे चाहो जब चाहो खरीद लो ?

या तुम्हारे आंगन का कुआं जब चाहो बाल्टी डालो और पानी खींच लो ?

या पैर के चप्पल जूते की हर हमेशा पहन कर घीसते रहो

या कॉपी का सफेद पन्ना चाहो जो जब लिख डालो?

 या फिर दांतो की गंदगी कि सुबह शाम निकालते रहो? 

या फिर तुम्हारे भूख का इलाज आहार कि जब भूख लगे आहार बना लो ?

या फिर अंगुली के नाखून सर के बाल कैसे काटते रहो ?

बता हम हैं कौन ?

तुम्हारे बागों के फूल कि तुम जब चाहो रस चूसते रहो ?

या ढोल के चमड़े की जब चाहो जब जब चाहो पीटते रहो? 

या फिर आसमान के तारे के दिन रात टूटते रहो ?

बता हम हैं कौन ?

क्या है हमारी जात? 

हमसे कहो ,हमारी सुनो,एक नारी की पुकार।



(आशुतोष कुमार)

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