काला।[17जुलाई,2003]
काला । [17 जुलाई,2003]
काले रंग से नफरत है, तो काले बाल कटवा डालो ।
काले रंग से नफरत है, तो काले बाल कटवा डालो ।
छतरी को डालो फाड़, अंधेरा खत्म कर दो विश्व से । कहलाओ माटी के लाल ।
काट दो काली गाय भैंस को,
जो श्वेत दूध देती है।
शर्म करो काले रंग पर,
अभिमान करो गोरे रंग पर ।
पर काले वनमानुष की संतान हो ।
बसेरा था वही काला पहाड़ और उसकी गुफा,
उसी काली पर लाज तुम्हें है?छिलवा डालो शरीर की चमड़ी ।
काले रंग पर यदि हो खफा,
तो काली को मत देवी कहो।
काले रंग से नफरत है तो,कन्हैया को मत भगवान कहो।
काजल का श्रृंगार करो ना, बादल को जेल करो।
अगर गर्व है गोरापन पर, तो अपनी गुलामी पर नाज करो।
आमंत्रित करो अंग्रेजों को, कि आकर फिर से राज करो।
बर्बाद कर दो कोयला को, इससे खाना पकाना बंद करो ।
तोड़ दो काले श्यामपट्ट को,
इससे भविष्य बनाना बंद करो।
फोड़ दो इन काली आंखों को,
या नजर फिर अपनी बंद करो।
क्या हिंदू-मुस्लिम ? क्या ऊंच-नीच ? क्या द्वीज-शूद्र?
सब एक करो!
वनवासी-आदिवासी इन जिंदा इंसानों को काला- कलूटा-दैत्य कहना बंद करो।
काले रंग से नफरत है, तो अंधेरा विश्व से खत्म करो।
यदि प्रेम है गोरी चमड़ी से,
तो काले दिमाग का नाश करो।
तुम हो अगर आदमी ? तो काले-गोरे की नीति खत्म करो! खत्म करो!
(आशुतोष कुमार)
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