सभ्यता और संस्कृति में अंतर। [11 जुलाई,2020)

सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ?



समान है या भिन्न ?


दोनों शब्द बड़ा ही भ्रामक(confusing) और रोचक है।अक्सर लोग सभ्यता और संस्कृति को अपनी बोलचाल की भाषा में,एक ही चीज समझ लेते हैं और दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं, लेकिन दोनों में फर्क होता है। इन दोनों शब्दों की ऐसी कोई विशिष्ट या सटीक परिभाषा नहीं है कि आप उसे रट  लें। हां ! इन दोनों का अर्थ समझ कर आप दोनों शब्दों के सही प्रयोग अपने दैनिक जीवन में आसानी से कर सकते हैं।


अंग्रेजी में अर्थ-


सभ्यता की अंग्रेजी सिविलाइजेशन(civilisation) होती है जबकि संस्कृति की अंग्रेजी कल्चर(culture)होती है।


प्राचीन मानव व संस्कृति की गतिशीलता


प्रारंभ में मनुष्य सिर्फ खाने के लिए और अपनी सुरक्षा के लिए नए-नए तरीके ढूंढता था। सभ्यता का विकास होता गया और संस्कृति भी विकसित होती गयी। यानी संस्कृति परिवर्तनशील और गतिशील होती है क्योंकि सभ्यता के विकास के साथ-साथ नए विचार और नए कौशल भी आते रहते हैं ।


भौतिक विकास और मानसिक विकास


उत्पादन के नए तरीके,परिवहन के नए साधन,संचार के नए साधन आदि भौतिक विकास के पक्ष हैं । यानी यह सभ्यता के मानदंड है,जबकि हमारा धर्म,हमारे विचार,हमारे रीति- रिवाज,हमारी परंपरा आदि चीजें संस्कृति के मानदंड हैं ।

सभ्यता का संबंध हमारी भौतिक प्रगति से है जबकि संस्कृति का संबंध मानसिक क्षेत्र की प्रगति से  है।


उत्तरोत्तर विकास


आदिमानव के बाद से धीरे-धीरे मनुष्य ने जीने के बेहतर तरीके खोजे। यह सभ्यता का विकास था। सभ्यता के विकास के साथ-साथ मनुष्य ने आंतरिक अनुभूति के लिए,आंतरिक सुख के लिए भी तरीके(जैसे-नृत्य,गायन,वादन यानी संगीत ,खेल आदि मनोरंजन) खोजे,जो बाद के कालखंड में ईश्वर प्राप्ति के साधन भी माने गये। यह संस्कृति का विकास था।


पैमाने पर माप


 सभ्यता को पैमाने से मापा जा सकता है क्योंकि इसमें भौतिक पक्ष प्रधान होता है, जबकि संस्कृति को मापने का कोई विशेष पैमाना नहीं होता,क्योंकि उसमें वैचारिक पक्ष प्रबल होता है ।


पेड़-फूल व सुगंध


यदि पेड़ और फूल सभ्यता है तो उस फूल से आने वाली सुगंध संस्कृति समझी जाएगी।


अपने शारीरिक सुख को बढ़ाने के लिए भौतिक रूप से हम कई साधन अपनाते हैं यानी सभ्यता साधन है, जबकि मानसिक और आध्यात्मिक सुख ही अंतिम लक्ष्य यानी साध्य है ।


उदाहरण से समझें-


सभ्यता का संबंध मस्तिष्क विकास से है। मस्तिष्क के विकास के साथ-साथ सभ्यता का विकास होता गया,जबकि संस्कृति का संबंध संस्कार से हैं । जैसे-रोटी के उत्पादन के या निर्माण के कई तरीके निकालना या आविष्कार करना सभ्यता में आता है,लेकिन उत्पादित रोटी को सबके साथ बांट-बांट कर खाना है,यह संस्कृति में आता है।


चिकित्सा की नयी-नयी तकनीकें सभ्यता के अंतर्गत आती हैं,लेकिन एक डॉक्टर अपने स्वार्थ के लिए किसी गर्भवती मां को डरा कर ऑपरेशन नहीं कराए यह संस्कृति सिखाती है ।


कृत्रिम दूध बनाने के नए तरीके या तकनीक सभ्यता के अंतर्गत आता है,लेकिन ज्यादा लाभ की चाह में मिलावट नहीं करना है,यह संस्कार सिखाता है ।


यानी कुल मिलाकर बाहरी विकास सभ्यता है और मन-विचार-कौशल-अध्यात्म का विकास संस्कृति है। सभ्यता का अंतिम लक्ष्य संस्कृति ही है।सभ्यता जीवन-स्तर(Standard Of Life) का सूचक है,जबकि संस्कृति जीवन-शैली(Life Stlye) की परिचायक है।



नोट-यहां यह जरूरी नहीं है कि जिसकी सभ्यता जितनी ज्यादा विकसित होगी,उसकी संस्कृति भी उतनी समृद्ध होगी । यहां यह बहस का मुद्दा है कि विकसित अमेरिका के अर्धनग्न नर- नारी ज्यादा संस्कृत हैं या भारत में गरीबी में जीने वाले अर्धनग्न नर-नारी ज्यादा संस्कृत हैं ? यह आपके विवेक पर छोड़ता हूँ।क्योंकि पश्चिमी देशों में अर्धनग्न रहने की संस्कृति है,जबकि पूर्व के भारत जैसे देशों में शरीर ढक कर रखने की संस्कृति है।समय,कालखंड और स्थान के अनुसार संस्कृतियां भिन्न-भिन्न होती हैं।


(मौलिक रूप में आलेख-आशुतोष कुमार)

#दिनांक-11 जुलाई,2020




Comments

Post a Comment

Thank You Very Much !