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What Is Light ? प्रकाश क्या है ? सरल तरीके से समझें और परिभाषा लिखें।

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Symbols of Chemical Elements.

https://youtu.be/hoCRA98sK84

SVSB APP-CERTIFICATE DOWNLOAD PROBLEM AND SOLUTION

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SVSB APP-CERTIFICATE DOWNLOAD SOLUTION●(12JULY,2020] SVSB APP-CERTIFICATE DOWNLOAD SOLUTION समस्या क्या है ? स्वच्छ विद्यालय स्वस्थ बच्चे एप्लीकेशन में जब हम रजिस्ट्रेशन करके, लॉगइन करके कोविड-19 और वाश चैंपियन का टेस्ट पूरा कर लेते हैं। तो हमारे सामने यह पेज आ जाता है । हम ज्यों ही get certificate को click करते हैं तो screen पर हमारा सर्टिफिकेट आता है और उसके नीचे download का विकल्प दिखता है।ज्योंही download पर click करते हैं तो लिखता है could not download.URL is Invalid.जैसा कि नीचे के चित्र में देख सकते हैं- समाधान क्या है ? आज हम इसी समस्या के समाधान की बात करेंगे जो कि हंड्रेड परसेंट कार्य करेगा तो चलिए दोस्तों सीखते हैं step by step- 1. इस पेज पर आप का सर्टिफिकेट है और उसके नीचे डाउनलोड का ऑप्शन है।आपके मोबाइल स्क्रीन के सबसे ऊपर सर्च बार है।उस पर अंगुली से क्लिक करें और अंगुली को कुछ देर उसमें टिकाए रखें ! 2.अंगुली टिकाए रखने के चलते सर्च बार के नीचे कई विकल्प खुलेंगे जो कि क्रम से हैं --सर्च,लिंक,कट,कॉपी,सेंड के।चित्र देखें-- 3.इसमें से आप चौथे(यानी कॉपी) विकल्प को क्लिक करें...

SVSB COVID-19 QUESTIONS IN HINDI

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SVSB COVID 19 QUESTIONS IN HINDI

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SVSB COVID 19 QUESTIONS IN      HINDI नमस्ते शिक्षक मित्रों !👏    विषय क्या है ? आप जानते हैं कि lockdown के पश्चात स्कूल खुलने के पूर्व COVID 19 से सुरक्षा  व स्वच्छ्ता को मद्देनजर रखते हुए हमें ONLINE TRAINING  कराने का कार्यक्रम चल रहा है। इसके लिए झारखंड सरकार ने स्वच्छ विद्यालय स्वस्थ बच्चे[SVSB] नामक App(Software) Play Store में उपलब्ध कराया है,जिसे हमें इनस्टॉल करके,रजिस्ट्रेशन करके,लॉगइन करके दो तरह के कोर्स मेटीरियल पढ़कर  दो तरह के टेस्ट देने हैं। समस्या क्या है ? झारखंड के आदरणीय हिंदी भाषी शिक्षकों के लिए थोड़ा हास्यास्पद और परेशानी की बात है कि कोर्स मेटीरियल और टेस्ट दोनों ही English Language में उपलब्ध है न कि हिंदी भाषा में।इसलिए हम शिक्षक सभी प्रश्नों को अच्छे से जानते-समझते हुए भी हमारे कई शिक्षक मित्र minimum qualifying marks(i.e.=70% of full marks) से पीछे रह जाते हैं,जिससे उन्हें बार-बार test देना पड़ रहा है और ऊपर से software का सर्वर भी बैलगाड़ी की चाल में है। समाधान- उन्हीं दोस्तों की सुविधा के लिए english प्रश्नों को सरल करन...

LSRW OF ENGLISH#PART-21#SOUND OF "OE"

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SVSB APP से Certificate download नहीं हो रहा है तो इस तरीके से करें। It works 500%.

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CHEMICAL FORMULA(रासायनिक सूत्र) के लिए ऑक्सीकरण संख्या याद रखें समझकर।

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LSRW OF ENGLISH#PART-20#SOUND OF "EW"

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SVSB TUTORIAL#COVID-19 & WASH[11जुलाई,2020]

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■Preparedness of teachers to manage post COVID scenario in schools. ■पहला-COVID -19 RESPONSE CERTIFICATE ■तथा दूसरा Teachers training on WASH in schools (WASH CHAMPIONS CERTIFICATE) ■संयुक्त रूप से संचालित- UNICEF+ASCI+JEPC ■Certificate प्राप्त करने का step- by-step process इस प्रकार से है - 1.SVSB Jharkhand App को play store से Download करें ! ( यदि पहले से है तो उसे Uninstall करके Install करें ! )  2 नीचे के सबसे अंतिम आइकॉन.e- learning को क्लिक करें ! 3.अपने स्कूल का UDISE CODE भरें !फिर सबमिट बटन दबाएँ ! 4.आपके विद्यालय के लोकेशन/प्रोफाइल की पूर्ण जानकारी सामने होगी । 5.सबसे नीचे ब्लू कलर में Teacher Login लिखा है,उसको क्लिक करें ! 6. मोबाइल नंबर और पासवर्ड दिखेगा।सबसे नीचे दो विकल्प दिखेंगे। उसमें से आप…. 7... Register को क्लिक करें ! 8. अपनी पूर्ण जानकारी अंकित करें जैसे नाम, मोबाइल नंबर,ईमेल,पता(यानी स्कूल का नाम सहित स्कूल का पता),शहर का नाम, पिन कोड और पासवर्ड दर्ज करें! 9.पासवर्ड बनाने  में कम से कम 8  characters  होने चाहिए,जिसमें कैपिटल लेटर्स ,स्मॉल ले...

सभ्यता और संस्कृति में अंतर। [11 जुलाई,2020)

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सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ? समान है या भिन्न ? दोनों शब्द बड़ा ही भ्रामक(confusing) और रोचक है।अक्सर लोग सभ्यता और संस्कृति को अपनी बोलचाल की भाषा में,एक ही चीज समझ लेते हैं और दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं, लेकिन दोनों में फर्क होता है। इन दोनों शब्दों की ऐसी कोई विशिष्ट या सटीक परिभाषा नहीं है कि आप उसे रट  लें। हां ! इन दोनों का अर्थ समझ कर आप दोनों शब्दों के सही प्रयोग अपने दैनिक जीवन में आसानी से कर सकते हैं। अंग्रेजी में अर्थ- सभ्यता की अंग्रेजी सिविलाइजेशन(civilisation) होती है जबकि संस्कृति की अंग्रेजी कल्चर(culture)होती है। प्राचीन मानव व संस्कृति की गतिशीलता प्रारंभ में मनुष्य सिर्फ खाने के लिए और अपनी सुरक्षा के लिए नए-नए तरीके ढूंढता था। सभ्यता का विकास होता गया और संस्कृति भी विकसित होती गयी। यानी संस्कृति परिवर्तनशील और गतिशील होती है क्योंकि सभ्यता के विकास के साथ-साथ नए विचार और नए कौशल भी आते रहते हैं । भौतिक विकास और मानसिक विकास उत्पादन के नए तरीके,परिवहन के नए साधन,संचार के नए साधन आदि भौतिक विकास के पक्ष हैं । यानी यह सभ्यता के मानदंड है,जबकि हमारा ...

ताकि राष्ट्र जिन्दा रहे ![11 जनवरी,2004]

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सिर्फ जिंदा लोगों से नहीं चलती यह जीवित दुनिया, सिर्फ जिंदा लोगों से नहीं चलती यह जीवित दुनिया, खुद को मिटाना पड़ता है ताकि राष्ट्र जिंदा रहे । मोमबत्ती खुद जलकर, दुनिया प्रकाशमान करती है, धान खुद नष्ट होकर अधिक अन्न हमें देती है, उसी तरह शरीर गलाना पड़ता है ताकि राष्ट्र जिंदा रहे | खुदीराम जले,भगत सिंह जले,  राजगुरु जले,सुखदेव जले, गांधी जले, गणेश शंकर विद्यार्थी जले, लक्ष्मीबाई मिटीं,बेगम हजरत महल मिटीं, इसी तरह मरने-मिटने का यह सिलसिला जारी रखना पड़ता है,ताकि राष्ट्र जिंदा रहे । सुभाष बाबू जले, आजाद जले, अशफ़ाकउल्ला जले,बटुकेश्वर जले, उसी तरह व्यक्तित्व को जलाना पड़ता है,ताकि मजार जलता रहे। खुद अपनी चिता जलानी पड़ती है,शरीर का खून भी देना पड़ता है,ताकि देश आजाद रहे! वतन जिंदा रहे! चमन महकता रहे! राष्ट्र जिंदा रहे! सिर्फ जिंदा लोगों से नहीं चलती यह जीवित दुनिया, खुद को मिटाना पड़ता है ताकि राष्ट्र जिंदा रहे। (आशुतोष कुमार)

काला।[17जुलाई,2003]

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काला । [17 जुलाई,2003] काले रंग से नफरत है, तो काले बाल कटवा डालो । काले रंग से नफरत है, तो काले बाल कटवा डालो । छतरी को डालो फाड़, अंधेरा खत्म कर दो विश्व से । कहलाओ माटी के लाल । काट दो काली गाय भैंस को,  जो श्वेत दूध देती है।  शर्म करो काले रंग पर, अभिमान करो गोरे रंग पर । पर काले वनमानुष की संतान हो । बसेरा था वही काला पहाड़ और उसकी गुफा, उसी काली पर लाज तुम्हें है?छिलवा डालो शरीर की चमड़ी । काले रंग पर यदि हो खफा, तो काली को मत देवी कहो। काले रंग से नफरत है तो,कन्हैया को मत भगवान कहो।  काजल का श्रृंगार करो ना, बादल को जेल करो।  अगर गर्व है गोरापन पर, तो अपनी गुलामी पर नाज करो।  आमंत्रित करो अंग्रेजों को, कि आकर फिर से राज करो। बर्बाद कर दो कोयला को, इससे खाना पकाना बंद करो । तोड़ दो काले श्यामपट्ट को, इससे भविष्य बनाना बंद करो। फोड़ दो इन काली आंखों को, या नजर फिर अपनी बंद करो। क्या हिंदू-मुस्लिम ? क्या ऊंच-नीच ? क्या द्वीज-शूद्र? सब एक करो!  वनवासी-आदिवासी इन जिंदा इंसानों को काला- कलूटा-दैत्य कहना बंद करो।  काले रंग से नफरत है, तो अंधेरा विश्व से...

काफी है कविता बनने के लिए।#12 जनवरी,2004

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https://youtu.be/weVpDphzqig कविता लिखने के लिए किसी साधना अथवा तपस्या की जरूरत नहीं, कविता लिखने के लिए किसी साधना अथवा तपस्या की जरूरत नहीं, आपका समाज काफी है कविता का विषय बनने के लिए । नदी अथवा समुद्र के किनारे बैठकर समुद्री लहरों को देखने की जरूरत नहीं, आपका समाज और राष्ट्र काफी है कविता का विषय बनने के लिए। किसी पहाड़ पर जाकर या ऐवरेस्ट की चोटी पर बैठकर रमणियों से लिप्त होकर आकाश के तारों को गिनने अथवा निहारने की जरूरत नहीं, आपके समाज की औरतों का दर्द काफी है कविता बनने के लिए । किसी जंगल में जाकर एकांत में सोचने की जरूरत नहीं, आपके समाज के शोषित बच्चों का दर्द काफी है कविता का विषय बनने के लिए । घर के किसी कोने में बैठ कर अंधेरे में सोचने-विचारने व कॉपी बर्बाद करने की जरूरत नहीं, आपके समाज की विषमता वाली सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक अन्याय काफी हैं आपकी कविता का विषय बनने के लिए। किसी स्त्री की देह का वर्णन या फिर पुरुष के सौंदर्य वर्णन की आवश्यकता नहीं, हमारे समाज के कमजोर तबके की आह काफी हैं आपकी कविता का विषय बनने के लिए। आपकी कविता का विषय दागदार खादी को बनाने की जरूरत नहीं, ...

हम हैं कौन ?(आधी आबादी)#3 अक्टूबर,2004

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Youtube link --   https://youtu.be/Lqt27PphIe0   हम हैं कौन ? तुम्हारे खेल की गेंद कि जब चाहो ठोकर मार लो?   या फिर तुम्हारे शरीर की कमीज की जब चाहो खोलो पहन लो ? या अपने घर की दीवार की जब चाहे खूंटी ठोक दो?   या फिर बाल के जुड़े कि जब चाहो कंघी लगाकर निकाल दो?   या फिर बच्चों के खेलने का मिट्टी का घरौंदा कि जब चाहो भांग दो तोड़ दो ? या फिर बाजार के बिकती वस्तु में जिसे चाहो जब चाहो खरीद लो ? या तुम्हारे आंगन का कुआं जब चाहो बाल्टी डालो और पानी खींच लो ? या पैर के चप्पल जूते की हर हमेशा पहन कर घीसते रहो ?  या कॉपी का सफेद पन्ना चाहो जो जब लिख डालो?  या फिर दांतो की गंदगी कि सुबह शाम निकालते रहो?   या फिर तुम्हारे भूख का इलाज आहार कि जब भूख लगे आहार बना लो ? या फिर अंगुली के नाखून सर के बाल कैसे काटते रहो ? बता हम हैं कौन ? तुम्हारे बागों के फूल कि तुम जब चाहो रस चूसते रहो ? या ढोल के चमड़े की जब चाहो जब जब चाहो पीटते रहो?   या फिर आसमान के तारे के दिन रात टूटते रहो ? बता हम हैं कौन ? क्या है हमारी जात?...

राजनेता और उसका बचपन(व्यंग्य)।#24 जनवरी,2004

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https://youtu.be/_t9b-2Fb_zw मैं बचपन में मिट्टी खाता था। मैं बचपन में मिट्टी खाता था, अब बड़े-बड़े पूल और बांध खाता हूं। मैं बचपन में खिलौनों से खेलता था, अब बड़े-बड़े रेल और मोटर चबाता हूँ।  मैं बचपन में कागज और पेंसिल खा जाता था, अब बड़े-बड़े विद्यालय,महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की बिल्डिंग खा जाता हूँ। मैं बचपन में पांच का सिक्का चुरा कर रख लेता था, और अब करोड़ों-अरबों निगल जाता हूँ।  बचपन मे दोस्तों को आपस में लड़ा देता था, अब दो समुदायों में दंगे करा देता हूँ। मैं बचपन में मां बाप की जेब साफ करता था, अब जनता के पैसे साफ करता हूँ। पहली बार हाथ जोड़कर वोट के लिए प्रणाम करता था,अब हाथ जोड़कर मतदाता की गर्दन दबाता हूँ। बचपन में घोड़े की सवारी करता था, अब राजनेता होकर जनता की पीठ पर सवारी करता हूं। बचपन में मैं जुआ और शतरंज खेलता था, अब देश के साथ जुआ खेलता हूँ। मैं बचपन मे मिट्टी खाता था अब बड़े बड़े पुलिया और बाँध खाता हूं।  बचपन में चोरी कर पास हो जाता था, अब लाख रूपये में डिग्री दिलवाता हूँ। बचपन मे दूसरे को पीटता था, अब श...